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वाल्मीकि रामायण 45.20

उत्पपाताम् अग्नि संकाशम् हालाहल महाविषम् ।
तेन दग्धम् जगत् सर्वम् स देव असुर मानुषम् ॥१-४५-२०॥

पूरा अध्याय