ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 4444.9वाल्मीकि रामायण 44.9तथैव अंशुमता वत्स लोके अप्रतिम तेजसा । गंगाम् प्रार्थयता नेतुम् प्रतिज्ञा न अपवर्जिता ॥१-४४-९॥पिछलाअगलापूरा अध्याय