Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 44.14

प्लावयस्व त्वम् आत्मानम् नरोत्तम सदा उचिते ।
सलिले पुरुषश्रेष्ठ शुचिः पुण्यफलो भव ॥१-४४-१४॥

पूरा अध्याय