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वाल्मीकि रामायण 43.34

गंग संप्लावयामास यज्ञ वाटम् महत्मनः ।
तसया वलेपनम् ज्ञत्व कृद्धो जह्नुः च राघव ॥१-४३-३४॥

पूरा अध्याय