Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 41.8

स तम् प्रदक्षिणम् कृत्वा पृष्ट्वा चैव निरामयम् ।
पितृइन् स परिपप्रच्छ वाजि हर्तारम् एव च ॥१-४१-८॥

पूरा अध्याय