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वाल्मीकि रामायण 40.16

ते तम् प्रदक्षिणम् कृत्वा दिशा पालम् महागजम् ।
मानयन्तो हि ते राम जग्मुर् भित्त्वा रसातलम् ॥१-४०-१६॥

पूरा अध्याय