Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 40.14

स पर्वत वनाम् कृत्स्नाम् पृथिवीम् रघुनंदन ।
धारयामास शिरसा विरूपाक्षो महागजः ॥१-४०-१४॥

पूरा अध्याय