Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 4.5

कुशी लवौ तु धर्मज्ञौ राज पुत्रौ यशश्विनौ ।
भ्रातरौ स्वर संपन्नौ ददर्श आश्रम वासिनौ ॥१-४-५॥

पूरा अध्याय