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वाल्मीकि रामायण 37.28

प्रादुर्भूतम् ततः क्षीरम् कृत्तिकानाम् अनुत्तमम् ।
षण्णाम् षड् आननो भूत्वा जग्राह स्तनजम् पयः ॥१-३७-२८॥

पूरा अध्याय