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वाल्मीकि रामायण 37.19

कांचनम् धरणीम् प्राप्तम् हिरण्यम् अतुल प्रभम् ।
ताम्रम् कार्ष्णायसम् चैव तैक्ष्ण्यात् एव अभिजायत ॥१-३७-१९॥

पूरा अध्याय