ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 3737.17वाल्मीकि रामायण 37.17इह हैमवते पार्श्वे गर्भो अयम् संनिवेश्यताम् । श्रुत्वा तु अग्नि वचो गंगा तम् गर्भम् अतिभास्वरम् ॥१-३७-१७॥पिछलाअगलापूरा अध्याय