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वाल्मीकि रामायण 35.2

सुप्रभाता निशा राम पूर्वा संध्या प्रवर्तते ।
उत्तिष्ठ उत्तिष्ठ भद्रम् ते गमनाय अभिरोचय ॥१-३५-२॥

पूरा अध्याय