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वाल्मीकि रामायण 33.25

कृत उद्वाहम् तु राजानम् ब्रह्मदत्तम् महीपतिः ।
सदारम् प्रेषयामास स उपाध्याय गणम् तदा ॥१-३३-२५॥

पूरा अध्याय