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वाल्मीकि रामायण 33.19

स राजा ब्रह्मदत्तः तु पुरीम् अध्यवसत् तदा ।
कांपिल्याम् परया लक्ष्म्या देवराजो यथा दिवम् ॥१-३३-१९॥

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