ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 3333.15वाल्मीकि रामायण 33.15परितुष्टम् मुनिम् ज्ञात्वा गन्धर्वी मधुर स्वरम् । उवाच परम प्रीता वाक्यज्ञा वाक्य कोविदम् ॥१-३३-१५॥पिछलाअगलापूरा अध्याय