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वाल्मीकि रामायण 32.21

मा भूत् स कालो दुर्मेधः पितरम् सत्य वादिनम् ।
अवमन्यस्व स्व धर्मेण स्वयम् वरम् उपास्महे ॥१-३२-२१॥

पूरा अध्याय