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वाल्मीकि रामायण 32.12

ताः तु यौवन शालिन्यो रूपवत्यः स्वलंकृताः ।
उद्यान भूमिम् आगम्य प्रावृषि इव शतह्रदाः ॥१-३२-१२॥

पूरा अध्याय