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वाल्मीकि रामायण 31.23

पप्रच्छ मुनिशार्दूलम् कौतूहल समन्वितः ।
भगवन् कः नु अयम् देशः समृद्ध वन शोभितः ॥१-३१-२३॥

पूरा अध्याय