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वाल्मीकि रामायण 31.1

अथ ताम् रजनीम् तत्र कृतार्थौ राम लक्षणौ ।
ऊषतुर् मुदितौ वीरौ प्रहृष्टेन अंतरात्मना ॥१-३१-१॥

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