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वाल्मीकि रामायण 30.15

पश्य लक्ष्मण दुर्वृत्तान् राक्षसान् पिशित अशनान् ।
मानवास्त्र समाधूतान् अनिलेन यथा घनान् ॥१-३०-१५॥

पूरा अध्याय