ग्रंथवाल्मीकि रामायणबालकाण्डसर्ग 33.8वाल्मीकि रामायण 3.8कामार्थ गुण संयुक्तम् धर्मार्थ गुण विस्तरम् । समुद्रम् इव रत्नाढ्यम् सर्व श्रुति मनोहरम् ॥१-३-८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय