Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 3.8

कामार्थ गुण संयुक्तम् धर्मार्थ गुण विस्तरम् ।
समुद्रम् इव रत्नाढ्यम् सर्व श्रुति मनोहरम् ॥१-३-८॥

पूरा अध्याय