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वाल्मीकि रामायण 28.12

केचिद् अंगार सदृशाः केचिद् धूम उपमाः तथा ।
चन्द्र अर्क सदृशाः केचित् प्रह्व अंजलि पुटाः तथा ॥१-२८-१२॥

पूरा अध्याय