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वाल्मीकि रामायण 27.28

ततः प्रीत मना रामो विश्वामित्रम् महामुनिम् ।
अभिवाद्य महातेजा गमनाय उपचक्रमे ॥१-२७-२८॥

पूरा अध्याय