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वाल्मीकि रामायण 26.33

मूर्ध्नि रामम् उपाघ्राय इदम् वचनम् अब्रवीत् ।
इह अद्य रजनीम् राम वसाम शुभ दर्शन ॥१-२६-३३॥

पूरा अध्याय