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वाल्मीकि रामायण 26.31

कर्तव्यम् सुमहत् कर्म सुराणाम् राज सूनुना ।
एवम् उक्त्वा सुराः सर्वे जग्मुर् हृष्टा विहायसम् ॥१-२६-३१॥

पूरा अध्याय