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वाल्मीकि रामायण 26.22

यज्ञ विघ्न करी यक्षी पुरा वर्धेत मायया ।
वध्यताम् तावत् एव एषा पुरा संध्या प्रवर्तते ॥१-२६-२२॥

पूरा अध्याय