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वाल्मीकि रामायण 26.15

उद् धुन्वाना रजो घोरम् ताटका राघवौ उभौ ।
रजो मेघेन महता मुहूर्तम् सा व्यमोहयत् ॥१-२६-१५॥

पूरा अध्याय