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वाल्मीकि रामायण 25.4

विश्वामित्रोऽब्रवीत् वाक्यम् शृणु येन बलोत्कटा ।
वर दान कृतम् वीर्यम् धारयति अबला बलम् ॥१-२५-४॥

पूरा अध्याय