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वाल्मीकि रामायण 25.14

सैषा शाप कृताम् अर्षा ताटका क्रोध मूर्छिता ।
देशम् उत्सादयति एनम् अगस्त्या चरितम् शुभम् ॥१-२५-१४॥

पूरा अध्याय