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वाल्मीकि रामायण 25.11

भक्षार्थम् जात संरम्भा गर्जन्ती सा अभ्यधावत ।
आपतन्तीम् तु ताम् दृष्ट्वा अगस्त्यो भगवान् ऋषिः ॥१-२५-११॥

पूरा अध्याय