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वाल्मीकि रामायण 23.12

अवध्यतः च रुद्रेण चक्षुषा रघु नन्दन ।
व्यशीर्यन्त शरीरात् स्वात् सर्व गात्राणि दुर्मतेः ॥१-२३-१२॥

पूरा अध्याय