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वाल्मीकि रामायण 22.21

प्रति जग्राह ते विद्ये महर्षेर् भावित आत्मनः ।
विद्या समुदितो रामः शुशुभे भीम विक्रमः ॥१-२२-२१॥

पूरा अध्याय