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वाल्मीकि रामायण 2.11

तम् शोणित परीताङ्गम् चेष्टमानम् महीतले ।
भार्या तु निहतम् दृष्ट्वा रुराव करुणाम् गिरम् ॥१-२-११॥

पूरा अध्याय