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वाल्मीकि रामायण 18.39

अभ्यागच्छत् महातेजा विश्वामित्रो महामुनिः ।
स राज्ञो दर्शन आकांक्षी द्वार अध्यक्षान् उवाच ह ॥१-१८-३९॥

पूरा अध्याय