Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 18.34

बभूव परम प्रीतो देवैः इव पितामहः ।
ते यदा ज्ञान संपन्नाः सर्वैः समुदिता गुणैः ॥१-१८-३४॥

पूरा अध्याय