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वाल्मीकि रामायण 17.18

अप्रमेय बला वीरा विक्रान्ताः काम रूपिणः ।
ते गज अचल संकाशा वपुष्मंतो महाबलाः ॥१-१७-१८॥

पूरा अध्याय