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वाल्मीकि रामायण 17.10

वानरेन्द्रम् महेन्द्र आभम् इन्द्रः वालिनम् आत्मजम् ।
सुग्रीवम् जनयामास तपनः तपताम् वरः ॥१-१७-१०॥

पूरा अध्याय