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वाल्मीकि रामायण 16.4

स हि तेपे तपः तीव्रम् दीर्घ कालम् अरिंदम ।
येन तुष्टोऽभवत् ब्रह्मा लोक कृत् लोक पूर्वजः ॥१-१६-४॥

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