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वाल्मीकि रामायण 16.13

शुभ लक्षण संपन्नम् दिव्य आभरण भूषितम् ।
शैल शृङ्ग समुत्सेधम् दृप्त शार्दूल विक्रमम् ॥१-१६-१३॥

पूरा अध्याय