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वाल्मीकि रामायण 15.34

तमेव हत्वा स बलम् स बान्धवम्विरावणम् रावणम् उग्र पौरुषम् ।
स्वर् लोकम् आगच्छ गत ज्वरः चिरम्सुरेन्द्र गुप्तम् गत दोष कल्मषम् ॥१-१५-३४॥

पूरा अध्याय