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वाल्मीकि रामायण 15.22

अवध्यम् दैवतैः विष्णो समरे जहि रावणम् ।
स हि देवान् स गन्धर्वान् सिद्धान् च ऋषि सत्तमान् ॥१-१५-२२॥

पूरा अध्याय