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वाल्मीकि रामायण 14.54

जांबूनदम् कोओटि संख्यम् ब्राह्मणेभ्यो ददौ तदा ।
दरिद्राय द्विजाय अथ हस्त आभरणम् उत्तमम् ॥१-१४-५४॥

पूरा अध्याय