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वाल्मीकि रामायण 14.43

प्राचीम् होत्रे ददौ राजा दिशम् स्वकुल वर्धनःअध्वर्यवे प्रतीचीम् तु ब्रह्मणे दक्षिणाम् दिशम् ॥१-१४-४३॥

पूरा अध्याय