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वाल्मीकि रामायण 10.9

न तेन जन्म प्रभृति दृष्ट पूर्वम् तपस्विना ।
स्त्री वा पुमान् वा यच्च अन्यत् सत्त्वम् नगर राष्ट्रजम् ॥१-१०-९॥

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