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ऋग्वेद 99.2

अध॑ क्ष॒पा परि॑ष्कृतो॒ वाजाँ॑ अ॒भि प्र गा॑हते । यदी॑ वि॒वस्व॑तो॒ धियो॒ हरिं॑ हि॒न्वन्ति॒ यात॑वे ॥२॥

पूरा अध्याय