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ऋग्वेद 97.22

तक्ष॒द्यदी॒ मन॑सो॒ वेन॑तो॒ वाग्ज्येष्ठ॑स्य वा॒ धर्म॑णि॒ क्षोरनी॑के ।
आदी॑माय॒न्वर॒मा वा॑वशा॒ना जुष्टं॒ पतिं॑ क॒लशे॒ गाव॒ इन्दु॑म् ॥२२॥

पूरा अध्याय