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ऋग्वेद 86.16

प्रो अ॑यासी॒दिन्दु॒रिन्द्र॑स्य निष्कृ॒तं सखा॒ सख्यु॒र्न प्र मि॑नाति सं॒गिर॑म् ।
मर्य॑ इव युव॒तिभि॒ः सम॑र्षति॒ सोम॑ः क॒लशे॑ श॒तया॑म्ना प॒था ॥१६॥

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