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ऋग्वेद 84.2

आ यस्त॒स्थौ भुव॑ना॒न्यम॑र्त्यो॒ विश्वा॑नि॒ सोम॒ः परि॒ तान्य॑र्षति ।
कृ॒ण्वन्त्सं॒चृतं॑ वि॒चृत॑म॒भिष्ट॑य॒ इन्दु॑ः सिषक्त्यु॒षसं॒ न सूर्य॑ः ॥२॥

पूरा अध्याय