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ऋग्वेद 71.5

समी॒ रथं॒ न भु॒रिजो॑रहेषत॒ दश॒ स्वसा॑रो॒ अदि॑तेरु॒पस्थ॒ आ ।
जिगा॒दुप॑ ज्रयति॒ गोर॑पी॒च्यं॑ प॒दं यद॑स्य म॒तुथा॒ अजी॑जनन् ॥५॥

पूरा अध्याय