Utshovऐप डाउनलोड करें

ऋग्वेद 65.1

हि॒न्वन्ति॒ सूर॒मुस्र॑य॒ः स्वसा॑रो जा॒मय॒स्पति॑म् । म॒हामिन्दुं॑ मही॒युव॑ः ॥१॥

पूरा अध्याय